जब SC, ST आयोग हैं तो सवर्ण आयोग क्यों नहीं?’, UGC कानून के विरोध में मऊ में हुआ प्रदर्शन

मऊ में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में सवर्ण एकता मंच ने विरोध प्रदर्शन किया। इसमें मुख्य रूप से यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) कानून को वापस लेने और राष्ट्रीय सवर्ण आयोग का गठन करने की मांग उठाई गई।
जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को सवर्ण एकता मंच ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित कानून के विरोध में विरोध प्रदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार विरोध प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के साथ आम जनता ने भी भागीदारी की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यूजीसी के विवादित प्रावधानों को वापस लेने तथा सामाजिक और आर्थिक आधार पर नीतियों में सुधार करने की मांग उठाई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजेंद्र राम, जो कि अनुसूचित जाति से आते हैं, ने मंच से आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। उनके अनुसार आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान होना चाहिए तथा कोटा के भीतर कोटा जैसे विषयों पर भी विचार किया जाना चाहिए। राजेंद्र राम ने यूजीसी में ओबीसी से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए । उन्होंने कहा कि सन 2012 की गाइडलाइन को ही उचित माना जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस दिशा में पुनर्विचार करने की मांग की।
राष्ट्रीय सवर्ण आयोग के गठन की मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सवर्ण आयोग के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। राजेंद्र राम ने कहा कि देश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मानवाधिकार समेत विभिन्न विषयों के लिए आयोग मौजूद हैं, ऐसे में सामान्य वर्ग के लिए भी राष्ट्रीय आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
‘मैं दलित हूं, हिंदू भी और अंबेडकरवादी भी’
पत्रकारों के सवाल पर राजेंद्र राम ने कहा कि किसी जाति में जन्म लेना किसी व्यक्ति की अन्य पहचान को समाप्त नहीं करता। उन्होंने स्वयं को राष्ट्रभक्त, देशभक्त, हिंदू, दलित और अंबेडकरवादी बताया। उन्होंने कहा कि वे इन सभी पहचानों को साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने कहा कि वे भारत माता की जय और वंदे मातरम् का नारा लगाते हैं तथा सामाजिक एकता में विश्वास रखते हैं।
