September 26, 2026

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बड़ी खबर: किशाऊ बांध परियोजना पर 6 राज्यों की सहमति, 8 साल का गतिरोध खत्म, जानिए किस राज्य को क्या मिलेगा?

करीब आठ साल से पानी, बिजली और लागत के बंटवारे को लेकर अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना अब आगे बढ़ने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में छह राज्यों के बीच परियोजना को लेकर सहमति बनी और समझौते पर मुहर लगी।

बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हुईं। सहमति बनने के बाद अब परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

केंद्र उठाएगा 90 फीसदी जल घटक की लागत

नई व्यवस्था के तहत परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के तौर पर उठाएगी। बाकी 10 फीसदी लागत छह राज्यों के बीच साझा होगी।

 

किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। परियोजना की मौजूदा क्षमता करीब 422 मेगावाट है। इससे करीब 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।

 

हरियाणा को सबसे बड़ा जल लाभ

पानी के हिस्से की बात करें तो किशाऊ परियोजना से हरियाणा को सबसे बड़ा फायदा मिलने जा रहा है। तकनीकी आकलन के मुताबिक हरियाणा के हिस्से में करीब 633 एमसीएम पानी आएगा। यह पानी सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण होगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया। उन्होंने कहा कि रेणुकाजी, किशाऊ और लखवाड़ परियोजनाओं से हरियाणा को कुल 1,280 क्यूसेक पानी मिलेगा। सैनी के मुताबिक कुल अतिरिक्त पानी का करीब दो-तिहाई हिस्सा अकेले किशाऊ परियोजना से आएगा।

उत्तर प्रदेश को 411 एमसीएम पानी

किशाऊ परियोजना से उत्तर प्रदेश को करीब 411 एमसीएम जल लाभ मिलने का अनुमान है। इससे यमुना बेसिन के क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल उपलब्धता मजबूत होगी। खासकर उन इलाकों को फायदा होगा जहां पानी की उपलब्धता पहले से चुनौती बनी हुई है।

 

राजस्थान को 124 एमसीएम का लाभ

राजस्थान के हिस्से में करीब 124 एमसीएम पानी प्रस्तावित है। राज्य के लिए इसका सीधा फायदा सिंचाई और पेयजल के मोर्चे पर होगा। पानी की कमी वाले इलाकों में उपलब्धता बढ़ाने में किशाऊ परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से अटकी परियोजनाओं पर अब सहमति बन रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि किशाऊ से राजस्थान की सिंचाई और पेयजल जरूरतों को बड़ी मदद मिलेगी।

 

दिल्ली को 80 एमसीएम पानी

राजधानी दिल्ली को परियोजना से करीब 80 एमसीएम पानी मिलने का प्रावधान है। दिल्ली के लिए इसका महत्व सिर्फ पानी की मात्रा तक सीमित नहीं है। ऊपरी यमुना बेसिन में पानी का भंडारण बढ़ने से राजधानी की दीर्घकालिक पेयजल जरूरतों को मजबूती मिल सकती है। साथ ही यमुना के प्रवाह को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

 

हिमाचल को वित्तीय राहत और बिजली से फायदा

किशाऊ परियोजना का सबसे अहम वित्तीय पहलू हिमाचल प्रदेश से जुड़ा है। परियोजना हिमाचल की सीमा में प्रस्तावित होने के बावजूद नई लागत व्यवस्था से राज्य पर बड़ा वित्तीय बोझ कम होगा।

 

सरकार द्वारा उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा हिमाचल के बिजली घटक की करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत में योगदान करेंगे। वहीं परियोजना शुरू होने के बाद हिमाचल को बिजली से करीब 600 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने का अनुमान है। यानी हिमाचल के लिए परियोजना में बड़ा फायदा वित्तीय राहत और भविष्य के बिजली राजस्व के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तराखंड को बिजली और क्षेत्रीय विकास

किशाऊ परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण राज्य उत्तराखंड है। परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा के पास प्रस्तावित है।उत्तराखंड को परियोजना से जलविद्युत उत्पादन, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने का फायदा मिल सकता है। तकनीकी आकलन में उत्तराखंड के लिए करीब 34 एमसीएम जल लाभ का प्रावधान भी दर्ज है।

 

एक नजर में छह राज्यों का फायदा

हरियाणा — 633 एमसीएम

सबसे बड़ा जल लाभ, सिंचाई और पेयजल में मदद।

 

उत्तर प्रदेश — 411 एमसीएम

सिंचाई और यमुना बेसिन में जल उपलब्धता बढ़ेगी।

 

राजस्थान — 124 एमसीएम

सिंचाई और पेयजल, खासकर पानी की कमी वाले इलाकों को फायदा।

 

दिल्ली — 80 एमसीएम

दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा और यमुना जल प्रबंधन में मदद।

 

हिमाचल प्रदेश — वित्तीय राहत + बिजली राजस्व

निर्माण लागत के बोझ में राहत और भविष्य में बिजली से बड़ा राजस्व।

उत्तराखंड — जलविद्युत + क्षेत्रीय विकास

बिजली उत्पादन के साथ बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा।

 

15 हजार करोड़ की परियोजना

किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। बांध की ऊंचाई करीब 236 मीटर प्रस्तावित है और इसमें करीब 1,324 एमसीएम लाइव जल भंडारण क्षमता होगी। आठ साल के गतिरोध के बाद अब छह राज्यों की सहमति ने परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता खोल दिया है।

 

पानी में सबसे बड़ा लाभ हरियाणा को, वित्तीय राहत और बिजली राजस्व में हिमाचल को, जबकि पेयजल सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली और सिंचाई के लिहाज से यूपी-राजस्थान को बड़ा फायदा मिलने जा रहा है। किशाऊ अब सिर्फ एक बांध परियोजना नहीं, बल्कि छह राज्यों के बीच पानी, बिजली और लागत के बंटवारे पर बनी एक बड़ी सहमति बन गई है।

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