बड़ी खबर: यूपी का ‘फाजिलनगर’ अब ‘पावागढ़’ के नाम से जाना जाएगा, CM योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर जिले के फाजिलनगर कस्बे का नाम बदलकर पावागढ़ करने का ऐलान एक बार फिर किया है. उन्होंने मंगलवार को तमकुही में आयोजित एक कार्यक्रम में इसका ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अब फाजिलनगर का नाम पावागढ़ होगा.उन्होंने कहा कि अब हमने इसके नामकरण का भी प्रस्ताव कर दिया है, अब यह फाजिलनगर नगर नहीं बल्कि ‘पावागढ़’ के नाम से जाना जाएगा. हम इसे मान्यता देने जा रहे हैं.उन्होंने कहा कि अब इसका नाम भगवान महावीर के नाम से होगा, क्यों हम फाजिल कहेंगे.ऐसा दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फाजिलनगर कस्बे का नाम बदलने का ऐलान किया है. इससे पहले पिछले साल नवंबर में गाजियाबाद में आयोजित पंचकल्याणक महा महोत्सव में भी इसका ऐलान किया था.
आइए जानते हैं कि जिस फाजिलनगर का नाम बदलने जा रहा है, उसका गौतम बुद्ध और भगवान महावीर से क्या संबंध हैं.
फाजिलनगर का गौतम बुद्ध और महावीर से संबंध क्या है
फाजिलनगर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले का एक कस्बा है. इस कस्बे का जैन और बौद्ध धर्म दोनों से गहरा जुड़ाव है. बौद्ध कथाओं के मुताबिक भगवान बुद्ध बिहार से कुशीनगर (प्राचीन नाम कुशीनारा) आते समय फाजिलनगर से सटे तत्कालीन चेतीग्राम (वर्तमान में सठियांव) में अपने एक शिष्य के यहां रुके थे. ऐसी मान्यता है कि उनके शिष्य ने रात्रि भोज में उन्हें सुकर (सुअर) का मांस परोसा था. यह खाने से उनकी तबीयत बिगड़ गई. इसे गौतम बुद्ध का अंतिम भोजना माना जाता है. इसके बाद वो फाजिलनगर से करीब 20 किमी दूर स्थित कुशीनगर पहुंचे और महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया. फाजिलनगर के आसपास के गांवों में कई टीले हैं. इनमें से कुछ की खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कराई है. इसमें कई प्राचीन वस्तुएं मिली हैं. माना जाता है कि ये वस्तुएं बौद्ध कालीन हैं.
इस जगह का जैन धर्म से भी जुड़ाव है. ऐसी मान्यता है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने पावा (आज के फाजिलनगर) में अपने अंतिम उपदेश दिए थे. उन्होंने यहीं पर परिनिर्वाण हासिल किया था. हालांकि फाजिलनगर में महावीर के महापरिनिर्वाण को लेकर एकमत नहीं है. जैन धर्म से इस जुड़ाव की वजह से ही फाजिलनगर में स्थित इंटर कॉलेज का नाम पावानगर महावीर इंटर कॉलेज है. पावा मल्ल राजाओं की दूसरी राजधानी थी. उनकी पहली राजधानी कुशीनारा थी, जिसे आज कुशीनगर के नाम से जाना जाता है.
